Ghee in Hindi: घी क्या है, कैसे बनता है, कैसे पहचानें

Updated 8 min read घी का मतलब • FSSAI • लेबल के शब्द

Ghee in Hindi में घी ही कहते हैं, संस्कृत में घृत। घी दूध की वह चरबी है जो मक्खन या मलाई को धीमी आँच पर पकाकर, पानी उड़ाकर और दूध के solids छानकर बचती है। FSSAI के नियम में घी में कम से कम 99.5% दूध की चरबी और ज़्यादा से ज़्यादा 0.5% नमी होनी चाहिए। वनस्पति घी जैसा पीला दिखे, तब भी घी नहीं है।

Ghee in Hindi: घी का मतलब क्या है?

Ghee का हिंदी शब्द घी ही है। यह वही चीज़ है जो रसोई में दाल पर डलती है और पूजा के दीये में जलती है: दूध की चरबी, जिसमें से पानी और दूध के ज़्यादातर solids पकाकर निकाल दिए गए हों। संस्कृत में इसे घृत कहते हैं, और आयुर्वेद की दवाओं के नाम में यही शब्द आता है, जैसे "ब्राह्मी घृत"।

English में लोग घी को clarified butter भी लिख देते हैं। यह पास का शब्द है, पर एक जैसा नहीं: घी में आँच ज़्यादा देर चलती है, इसलिए उसमें भुने दूध की महक आती है। पूरा फर्क घी और clarified butter में अंतर पर है, और यही पेज English में what is ghee पर। घी खाने के फायदे और रोज़ की मात्रा घी खाने के फायदे पर हैं। यह पेज घी के नाम, नियम और लेबल के शब्दों के लिए है।

घी को दूसरी भारतीय भाषाओं में क्या कहते हैं?

उत्तर और पश्चिम भारत में घी लगभग एक ही नाम से चलता है, जबकि दक्षिण में नेय और तुप्पा जैसे अलग शब्द हैं। किसी दूसरे राज्य की दुकान या रेसिपी में ये नाम दिखें, तो चीज़ वही है।

हिंदी

घी

ghee

संस्कृत

घृत

ghrita

गुजराती

ઘી

ghee

मराठी

तूप

toop

पंजाबी

ਘਿਓ

ghio

बांग्ला

ঘি

ghi

तमिल

நெய்

nei

तेलुगु

నెయ్యి

neyyi

कन्नड़

ತುಪ್ಪ

tuppa

मलयालम

നെയ്യ്

neyyu

FSSAI के हिसाब से घी किसे कहते हैं?

FSSAI, यानी भारत का खाद्य सुरक्षा नियामक, घी को ऐसी चरबी मानता है जो सिर्फ़ दूध या दूध से बनी चीज़ों से बने, और जिसमें से पानी और दूध के बाकी solids लगभग पूरे निकाल दिए गए हों। उसी नियम में लिखा है कि घी की खास महक और बनावट उसके बनाने के तरीके से आती है। पैक पर "घी" लिखने के लिए नीचे की सीमाएँ पूरी होनी चाहिए।

दूध की चरबी

कम से कम 99.5%

100 ग्राम घी में कम से कम 99.5 ग्राम दूध की चरबी। बाकी लगभग कुछ नहीं।

नमी (पानी)

ज़्यादा से ज़्यादा 0.5%

पानी बचा तो घी कच्चा है। ऐसा घी धुंधला रहता है और जल्दी खराब होता है।

Free fatty acids (oleic acid के रूप में)

ज़्यादा से ज़्यादा 2.0%

नापता है कि चरबी कितनी टूट चुकी है। सही पका, ठीक से रखा घी इसके नीचे रहता है।

Baudouin test

Negative

तिल का तेल पकड़ता है। वनस्पति में तिल का तेल डालना FSSAI का नियम है, इसलिए यह वनस्पति की मिलावट भी पकड़ता है।

β-sitosterol

नहीं होना चाहिए

यह पौधों का sterol है, दूध का नहीं। मिले तो घी में वनस्पति तेल मिला है।

रंग, flavour, preservative

कुछ नहीं मिलाया

कच्चा माल सिर्फ़ दूध और दूध से बनी चीज़ें। ऊपर से रंग या खुशबू नहीं।

ये आँकड़े FSSAI के डेयरी नियम (Chapter 2.1, version 01.09.2023) से हैं। इनमें से कोई भी टेस्ट घर की रसोई में नहीं होता, ये lab में होते हैं। हम अपने घी की हर महीने इन्हीं FSSAI सीमाओं पर जाँच करवाते हैं। घर पर आप क्या देख सकते हैं, वह नीचे पहचान वाले हिस्से में है।

घी कैसे बनता है?

घी दो रास्तों से बनता है। मलाई वाले रास्ते में दूध से मलाई या cream अलग करके सीधे पकाई जाती है; ज़्यादातर बड़े कारखाने यही करते हैं, क्योंकि यह तेज़ है और कम दूध लगता है। दही वाले, यानी बिलोना रास्ते में दूध का दही जमाया जाता है, दही मथकर मक्खन निकाला जाता है, और फिर मक्खन पकाया जाता है। दोनों से बना माल FSSAI की सीमा में हो तो दोनों घी हैं।

हमारी रसोई में बिलोना घी कैसे बनता है

हम गिर सोमनाथ, गुजरात में सिर्फ़ बिलोना घी बनाते हैं। दूध रात भर, 8 से 12 घंटे, दही बनता है। सुबह दही को 30 से 45 मिनट मथते हैं, जब तक मक्खन अलग न हो जाए। फिर मक्खन लकड़ी के चूल्हे पर मिट्टी की मटकी में धीमी आँच पर 45 से 90 मिनट पकता है। जब बुलबुले शांत हो जाएँ, नीचे के solids सुनहरे-भूरे हो जाएँ और भुने दूध की महक आए, तभी मटकी उतरती है। दही से घी तक लगभग दो दिन लगते हैं।

इस काम में दो गलतियाँ जल्दी दिखती हैं। जल्दी उतारा घी धुंधला रहता है, उसमें पानी बचता है और वह जल्दी खराब होता है; यही वजह है कि FSSAI नमी की सीमा रखता है। ज़्यादा पका घी गहरा, कड़वा होता है और जली महक देता है। ऐसा कोई भी घी हम जार में नहीं भरते, वह घर के इस्तेमाल में रहता है। हर कदम की तस्वीरें हम घी कैसे बनाते हैं पर हैं, बिलोना के हर कदम का समय और रसायन बिलोना घी कैसे बनता है पर, और घर की कड़ाही में मलाई से घी how to make ghee at home पर।

देसी घी, शुद्ध घी, A2 और बिलोना घी में क्या फर्क है?

इनमें से सिर्फ़ "घी" FSSAI का तय नाम है। देसी और शुद्ध बाज़ार के शब्द हैं, गाय-भैंस जानवर बताते हैं, A2 दूध का protein बताता है, और बिलोना बनाने का तरीका। एक जार पर ये सब एक साथ लिखे हो सकते हैं, पर हर शब्द अलग बात कहता है।

घी

FSSAI का तय नाम। ऊपर की सीमाओं वाली दूध की चरबी।

कौन सा जानवर, कौन सा तरीका, यह नहीं बताता।

देसी घी

बोलचाल का शब्द: दूध से बना घी, वनस्पति नहीं।

FSSAI के घी standard में "देसी" की अलग श्रेणी नहीं है। नस्ल या तरीके का सबूत नहीं।

शुद्ध घी

बेचने वाले का दावा कि कुछ मिलाया नहीं।

यह certificate नहीं है। शुद्धता जाँच से पता चलती है, शब्द से नहीं।

गाय / भैंस का घी

किस जानवर का दूध है।

तरीका नहीं बताता। दोनों पर वही FSSAI सीमा लगती है।

A2

गाय के दूध के protein (beta-casein) की किस्म।

पकाने का तरीका नहीं। अच्छे घी में protein वैसे भी बहुत कम बचता है।

बिलोना

दूध से दही, दही मथकर मक्खन, फिर मक्खन से घी।

जानवर की नस्ल नहीं बताता।

बटर ऑयल

दूध की चरबी, पर FSSAI में घी से अलग नाम: नमी 0.4% तक, चरबी कम से कम 99.6%।

घी नहीं कहलाता। FSSAI घी की "खास महक और बनावट" को उसके बनाने के तरीके से जोड़ता है।

वनस्पति / डालडा

Hydrogenated वनस्पति तेल।

घी नहीं है, चाहे पीला हो और घी जैसा जमे।

"Desi ghee in Hindi" खोजने वाले ज़्यादातर यही पूछते हैं कि देसी घी और घी में क्या फर्क है। जवाब: चीज़ एक है। देसी शब्द आमतौर पर वनस्पति से अलग करने के लिए बोला जाता है। A2 का पूरा मतलब what is A2 ghee पर है, और बिलोना का दावा कैसे परखें, वह checking a Bilona claim पर।

क्या वनस्पति या डालडा घी है?

नहीं। FSSAI के नियम (Chapter 2.2) में वनस्पति का मतलब है refined वनस्पति तेल, जिसे hydrogenation से जमाया गया हो। उसमें दूध की चरबी नहीं होती। कई घरों में उसे "वनस्पति घी" या "डालडा घी" बोला जाता है, पर पैक पर उसका नाम वनस्पति ही है।

FSSAI का नियम वनस्पति में इतना तिल का तेल डालना ज़रूरी करता है कि Baudouin test में रंग आए। घी के लिए वही टेस्ट negative होना चाहिए। यानी अगर घी में वनस्पति मिलाया गया है, तो lab का यह टेस्ट उसे पकड़ लेता है। सेहत के हिसाब से भी फर्क है: ICMR-NIN के 2024 दिशानिर्देश कहते हैं कि वनस्पति जैसे partially hydrogenated तेल में trans fat हो सकता है, और इन्हें खाना पकाने में इस्तेमाल न करें। दोनों की पूरी तुलना ghee vs vanaspati पर है।

गाय का घी या भैंस का घी?

दोनों घी हैं और दोनों पर एक ही FSSAI सीमा लगती है; फर्क स्वाद, रंग और काम में है। गाय का घी हल्का और पीला होता है, रोज़ की दाल के लिए। भैंस का घी सफ़ेद और भारी होता है, पराठे और मिठाई के लिए।

रोज़ दाल, खिचड़ी, रोटी

गाय का घी

हल्का स्वाद, पीला रंग। रोज़ के एक चम्मच के लिए।

पराठा, हलवा, लड्डू

भैंस का घी

भारी स्वाद, सफ़ेद रंग। मिठाई और सेकने वाले काम में जमता है।

पूरी, पकौड़े, गहरा तलना

तेल

कड़ाही भर घी महँगा भी है और दिन की सीमा से बहुत ऊपर भी।

हमारी मटकी में यह फर्क दूध में दिखता है। एक किलो गिर गाय का घी बनाने में करीब 30 से 35 लीटर दूध लगता है, और एक किलो जाफराबादी भैंस का घी करीब 22 से 25 लीटर में बनता है, क्योंकि भैंस के दूध में चरबी ज़्यादा है। तवे और कड़ाही पर पूरा फर्क cow vs buffalo ghee पर है।

घी कहाँ और कितना इस्तेमाल करें?

घी सबसे ज़्यादा काम का गरम दाल, खिचड़ी या रोटी पर एक छोटे चम्मच में है। ICMR-NIN के 2024 दिशानिर्देश घी या मक्खन को दिन में 1 से 2 छोटे चम्मच तक रखने को कहते हैं, और उनकी diet tables में एक छोटा चम्मच तेल या घी 5 ग्राम गिना गया है। यानी रोज़ 5 से 10 ग्राम।

हमारे घर में हर व्यक्ति रोज़ 1 से 2 छोटे चम्मच खाता है, रोटी, दाल और खिचड़ी पर; सर्दियों में अड़दिया पाक और गोंद की मिठाई के साथ यह बढ़ता है। तड़का तेल या घी में करें, दोनों में नहीं। पूरी और पकौड़े तेल में तलें। उम्र और काम के हिसाब से मात्रा how much ghee per day पर है, और जार को महीनों ठीक कैसे रखें, वह ghee storage पर।

शुद्ध घी की पहचान कैसे करें?

पहले लेबल पढ़ें, फिर एक चम्मच गरम करके सूँघें, फिर दाम को दूध के हिसाब से देखें। घर की जाँच मिलावट का शक दे सकती है, पक्का जवाब सिर्फ़ ऊपर वाली lab जाँच देती है। खरीदते समय यह सूची साथ रखें:

घी का जार खरीदने से पहले: 7 बातें

  1. लेबल पर खाने का नाम "Ghee" या "घी" लिखा हो, "butter oil" या "vanaspati" नहीं।
  2. FSSAI licence नंबर छपा हो, जिसे foscos.fssai.gov.in पर जाँच सकें।
  3. Ingredients में सिर्फ़ दूध की चरबी या मक्खन/मलाई हो। रंग, flavour या तेल का नाम नहीं।
  4. एक चम्मच गरम करें: भुने दूध की महक आए। तेल जैसी, मीठी या खट्टी-बासी महक नहीं।
  5. दाना या तरल होना मौसम पर है। रंग से शुद्धता न नापें।
  6. दाम देखें: एक किलो गाय का घी 30 से 35 लीटर दूध खाता है। दूध से बहुत सस्ता घी सवाल है।
  7. बनाने की तारीख देखें। पुराना जार महक खो देता है।

WhatsApp पर हमसे सबसे ज़्यादा यही पूछा जाता है कि घी दानेदार क्यों है और इस बार रंग अलग क्यों है। दोनों मौसम की बात है, मिलावट की नहीं। घर पर होने वाले कौन से टेस्ट काम करते हैं और कौन से गुमराह करते हैं, वह शुद्ध घी की पहचान कैसे करें पर है। अपने जार को 2 मिनट में जाँचना हो, तो ghee purity checker खोलें।

रोज़ की दाल के लिए कौन सा घी?

बाज़ार में जार चुनते समय पहले खाने का नाम, फिर महक, फिर दाम देखें, और पूछें कि घी कब बना। ब्रांड कैसे चुनें, उसका क्रम घी खरीदते समय क्या देखें पर है।

रोज़ के चम्मच के लिए हम अपना गिर गाय का बिलोना घी रखते हैं, और पराठे-हलवे के लिए जाफराबादी भैंस का बिलोना घी। दोनों ऑर्डर आने के बाद बनते हैं, गिर के जंगल के पास चरने वाले गाँव के जानवरों के दूध से, बिना हार्मोन इंजेक्शन के। आपका जार बनते और पैक होते हुए का वीडियो WhatsApp पर आता है। हम खुद बनाते हैं, इसलिए यह हमारी पसंद है, और वीडियो की वजह से आप खुद देख सकते हैं।

रोज़ की दाल वाला चम्मच

पराठा, हलवा और लड्डू

Each order is cooked after you place it, and the packing video is of that batch. Past order videos are on the shop.

FAQ

Ghee को English में क्या कहते हैं?

English में भी इसे ghee ही कहते हैं, यह शब्द हिंदी से ही अंग्रेज़ी में गया है। सबसे पास का English शब्द clarified butter है, पर दोनों एक जैसे नहीं। Clarified butter में मक्खन अक्सर पानी उड़ते ही उतार लिया जाता है। घी में आँच तब तक चलती है जब तक नीचे के solids सुनहरे-भूरे न हो जाएँ, इसलिए उसमें भुने दूध की महक आती है।

क्या घी शाकाहारी है?

हाँ, घी दूध से बनता है, इसलिए भारत में उसे शाकाहारी खाना माना जाता है, जैसे दूध, दही और पनीर। पर घी vegan नहीं है, क्योंकि वह जानवर के दूध से आता है। जो लोग दूध की हर चीज़ छोड़ते हैं, उनके लिए घी की जगह तेल ही रहेगा। दूध से allergy हो, तो घी शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछें।

घी को फ्रिज में रखना चाहिए या नहीं?

ज़रूरी नहीं। अच्छी तरह पका, बंद जार कमरे के तापमान पर हमारे अनुभव में 9 से 12 महीने ठीक रहता है। खोलने के बाद सूखा चम्मच डालें, ढक्कन बंद रखें, और जार को चूल्हे और धूप से दूर रखें। गर्मी में घी जार में पिघला रहना आम बात है। गीला चम्मच या जूठा हाथ घी को जल्दी खराब करता है, फ्रिज न होना नहीं।

घी दानेदार क्यों होता है?

धीमी आँच पर बना घी ठंडा होते समय दाना बनाता है, क्योंकि उसकी अलग-अलग चरबी अलग तापमान पर जमती है। हमारे यहाँ सर्दी का घी बारीक दाने वाला जमता है और गर्मी में वही घी जार में तरल रहता है। दाना होना आम है, पर सिर्फ़ दाना देखकर शुद्धता तय न करें। महक, लेबल और दूध के हिसाब से दाम, तीनों साथ देखें।

घी का रंग हर बार अलग क्यों होता है?

घी का रंग चारे और जानवर से बदलता है। बारिश के मौसम में हरा चारा मिलने पर हमारा गिर गाय का घी और पीला हो जाता है। भैंस का घी आमतौर पर सफ़ेद होता है, क्योंकि भैंस के दूध में पीला रंग देने वाला carotene कम होता है। इसलिए पीला रंग शुद्धता का सबूत नहीं है, और सफ़ेद रंग मिलावट का सबूत नहीं।

घी और मक्खन में क्या फर्क है?

मक्खन में चरबी के साथ पानी और दूध के solids भी होते हैं, इसलिए वह फ्रिज में रखना पड़ता है और तेज़ आँच पर जल जाता है। घी उसी मक्खन को धीमी आँच पर पकाकर बनता है: पानी भाप बनकर उड़ जाता है और solids छन जाते हैं। बची हुई चरबी घी है, जो बंद जार में कमरे के तापमान पर महीनों चलती है।

Sources

  1. Food Safety and Standards (Food Products Standards) Chapter 2.1: Dairy products and analogues, version 01.09.2023 (2.1.8 Standard for Milk Fat Products: description, ghee limits, and labelling names, pp. 26-29), FSSAI. Checked 29 Sep 2026.
  2. Food Safety and Standards (Food Products Standards) Chapter 2.2: Fats, oils and fat emulsions, version 01.09.2023 (2.2.6 Hydrogenated vegetable oils: vanaspati definition and sesame oil for the Baudouin test, pp. 47-48), FSSAI. Checked 29 Sep 2026.
  3. Dietary Guidelines for Indians, 2024 (limit ghee and avoid vanaspati, PDF p. 27; Guideline 7, ghee or butter 1 to 2 teaspoons a day, p. 71; vanaspati and trans fats, p. 73; 5 g oil or ghee as 1 teaspoon, p. 130), ICMR-National Institute of Nutrition. Checked 29 Sep 2026.